ग्राम पंचायत देवामानल में भ्रष्टाचार को लेकर RTI कार्यकर्ता कपिल शर्मा ने उठाई आवाज

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डलहौज़ी हलचल (नाहन) : पंचायती राज प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर सक्रिय RTI कार्यकर्ता कपिल शर्मा ने ग्राम पंचायत देवामानल में एक बार फिर से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप उजागर किए हैं। यह मामला सिर्फ़ आर्थिक गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचना के अधिकार को दबाने और कार्यकर्ता को डराने-धमकाने से भी जुड़ा है।

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मस्टरोल दस्तावेज़ को लेकर पंचायत की चुप्पी

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कपिल शर्मा ने बताया कि उन्होंने 24 मार्च 2025 को 8560 नंबर का मस्टरोल RTI के माध्यम से मांगा था, जो सामूहिक भवन और सामूहिक सुरक्षा दीवार से संबंधित था। लेकिन पंचायत सचिव ने उत्तर दिया कि यह दस्तावेज़ उनके पास उपलब्ध नहीं है।

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बिना नाम, केवल फोटो — मस्टरोल में बड़े घोटाले के संकेत

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RTI कार्यकर्ता ने 2 से 15 मार्च 2025 तक के हाजिरी रजिस्टर और फोटोज़ ऑनलाइन पोर्टल से खुद डाउनलोड किए। उन्होंने कहा कि उनकी जांच में सामने आया कि कई ऐसे लोग मस्टरोल में दर्शाए गए हैं जिनके नाम सूची में नहीं हैं लेकिन उनकी फोटो मौजूद है। इससे यह शक और गहराता है कि सरकारी धन का गबन किया गया और संभवतः फर्जी फोटो अपलोड कर भुगतान निकाले गए।

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कपिल शर्मा ने 8 अप्रैल 2025 को रजिस्टर्ड डाक द्वारा RTI भेजी, लेकिन पंचायत सचिव ने उसे लेने से इनकार कर दिया, जिससे डाक वापस लौट आई। यह स्पष्ट रूप से RTI कानून का उल्लंघन है। सवाल यह है कि क्या अब जानकारी छुपाना ही एक नई प्रणाली बन चुका है?

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RTI कार्यकर्ता को ही बनाया गया निशाना

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जहां BDC देवेंद्र सिंह ने पहले प्रधान पर भ्रष्टाचार को लेकर शिकायत दर्ज करवाई थी और कोई कार्रवाई नहीं हुई, वहीं जब कपिल शर्मा ने वही मामला सार्वजनिक किया, तो उनके खिलाफ ही मानहानि का केस दर्ज करवा दिया गया।

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कपिल शर्मा ने इस पूरे मामले को लेकर अपनी पाँच प्रमुख मांगें भी स्पष्ट रूप से सामने रखी हैं। उन्होंने सबसे पहले 8560 नंबर के मस्टरोल को सार्वजनिक किए जाने की मांग की है ताकि भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि मस्टरोल में जिन मजदूरों की फोटो दर्शाई गई है, उनकी वास्तविक पहचान और उपस्थिति का सत्यापन कराया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, जिन लोगों के नाम मस्टरोल में नहीं हैं, लेकिन जिनकी फोटो दस्तावेज़ में शामिल है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। चौथी मांग के रूप में उन्होंने पंचायत सचिव पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग उठाई है, जिन्होंने न केवल RTI का जवाब देने से इनकार किया, बल्कि दस्तावेज़ को स्वीकार करने से भी मना कर दिया। अंत में, उन्होंने स्पष्ट किया कि एक RTI कार्यकर्ता के रूप में उन्हें झूठे मुकदमों से सुरक्षा मिलनी चाहिए, ताकि सच बोलने और भ्रष्टाचार उजागर करने की उनकी आवाज को दबाया न जा सके।

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    कपिल शर्मा का दो टूक बयान

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    “मैं अपराधी नहीं — RTI कार्यकर्ता हूँ। अगर भ्रष्टाचार उजागर करना जुर्म है, तो यह जुर्म मैं बार-बार करूंगा। सच्चाई को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं।

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